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मिनी IAS की दिनचर्या
सुबह के 11 बज चुके
हैं...
लेकिन कार्यालय की कुर्सी अभी भी
खाली है। सामने की टेबल पर चाय का पुराना दाग और एक अधूरी संचिका मूकदर्शक बनकर प्रतीक्षा
कर रहे हैं। तभी दरवाजे की चरमराहट होती है, और पधारते हैं — मिनी IAS, यानि हमारे प्रिय
सहायक प्रशाखा पदाधिकारी!
11:05 AM –
"अरे ट्रैफिक बहुत था यार!" – पहली आवाज़ , जो उनके हर दिन की शुरुआत का
स्थायी वाक्य होता है। देश की जीडीपी चाहे बढ़े न बढ़े, लेकिन उनके देर से आने की वजह
हमेशा "ट्रैफिक" ही रहता है — वो भी दो किलोमीटर के अंदर।
11:30 AM–
अब संचिकाओं की
“समीक्षा” शुरू होती है। तीन संचिका खोली जाती हैं, दो को बंद कर दिया जाता है, और एक को देखकर माथा सिकोड़ते हुए
कहा जाता है–
" इसमें कुछ गड़बड़
है... पहले इस पर दो मीटिंग कर लेते हैं।"
12:15 PM –
“जरा एक कप चाय लाना... थोड़ा कड़क।”
चाय पीते-पीते मोबाइल पर देश की समसामयिकी
का आभासी दर्शन किया जाता है और फिर उसके आधार पर कनीय कर्मियों के समक्ष "देश की गिरती व्यवस्था" पर व्याख्यान
प्रस्तुत किया जाता है।
1:00 PM –
“आज लंच थोड़ा जल्दी कर लेते हैं... भूख लग रही है।“
अब शुरू होता है लंच ब्रेक – जो
आधिकारिक तौर पर 30 मिनट का है, लेकिन मिनी IAS के लिए यह “मानवाधिकार” की तरह है
– सीमाओं से परे।
2:15 PM –
लौटते हैं, थोड़े थके हुए, थोड़े तृप्त।
फिर शुरू होती है “स्मरण शक्ति का
अभ्यास” – यानि पुरानी संचिकाओं पर लंबी फेंक ।”
"जब हम पुराने सचिवालय के निगरानी शाखा में थे, तब एक संचिका आई थी जो 200 पृष्ठों
की थी... मैंने एक दिन में निपटा दी!"
सामने बैठे कनीय कर्मचारी की आंखें
फटी की फटी रह जाती हैं — वो भूल जाता है कि आज की केवल दो पृष्ठों वाली संचिका
पिछले चार दिन से लटकी हुई है।
3:30 PM –
अब व्हाट्सएप, रील्स, न्यूज पोर्टल और ऑफिस की गपशप का
समय।
बीच-बीच में एक-दो फोन भी आते हैं, जिनमें अधिकतर यह बताया जाता है कि
"बहुत व्यस्त हूं, फाइलें बहुत हैं।”
4:15 PM –
अब निकलने की तैयारी। टेबल को
व्यवस्थित किया जाता है, कलम को ढक्कन में
बंद किया जाता है (जैसे तलवार म्यान में जा रही हो), और एक बार फिर ऐलान होता है –"कल से पूरी गति
से काम होगा। आज तो बहुत मीटिंग्स थीं!“
5:00 PM –
दफ्तर के अन्य कर्मी अभी भी काम में डूबे हैं, और हमारे मिनी IAS साहब मुस्कुराते हुए कार्यालय से पुनः
एकबार चाय पीने निकलते हैं —
चेहरे पर वही आत्मविश्वास, जैसे कोई मंत्री सदन
से बहस जीतकर निकल रहा हो।
इसप्रकार
सहायक प्रशाखा पदाधिकारी की दिनचर्या
देखकर समझ आता है कि मिनी IAS का जीवन वास्तव में
संतुलन और "मैनेजमेंट" का उत्तम उदाहरण है — समय का मैनेजमेंट, संचिका को टालना, और जिम्मेदारी का ज्ञाप
प्रारूप अथवा पीतपत्र लगाकर हस्तांतरण।
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